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हिमाचल के 10 युवा बने सेना और वायुसेना अफसर, प्रदेश का बढ़ाया मान

हिमाचल के 10 युवाओं ने सेना और वायुसेना में अफसर बनकर बढ़ाया प्रदेश का मान

आईएमए देहरादून से पासआउट होकर नौ युवा बने सेना अधिकारी, एक युवती बनी फ्लाइंग ऑफिसर

सैन्य परंपरा वाले परिवारों की नई पीढ़ी ने संभाली देश सेवा की विरासत


हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व और गौरव का क्षण है। प्रदेश के नौ युवाओं ने भारतीय सेना में अधिकारी बनकर और एक युवती ने भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनकर देश सेवा की नई जिम्मेदारी संभाली है। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) देहरादून और वायुसेना के प्रशिक्षण संस्थानों से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद इन युवाओं ने राष्ट्र सेवा की शपथ ली। उनकी इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवारों में खुशी का माहौल है बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश में गर्व की भावना देखी जा रही है।

आईएमए देहरादून में आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड के दौरान इन युवा अधिकारियों ने सेना की वर्दी पहनकर देश की रक्षा का संकल्प लिया। वर्षों की कठिन मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बाद इन युवाओं ने वह मुकाम हासिल किया है, जिसका सपना उन्होंने बचपन से देखा था।

 

हमीरपुर के नादौन क्षेत्र के समहूं गांव की देवांशी शर्मा भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनी हैं। देवांशी को रक्षा सेवाओं में जाने की प्रेरणा उनके नाना कर्नल रोशन लाल शर्मा से मिली। उनके पिता इंजीनियर राजेश शर्मा और माता नीना शर्मा ने बताया कि बेटी बचपन से ही वायुसेना की वर्दी पहनकर देश सेवा का सपना देखती थी। आज उसकी मेहनत ने पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

कांगड़ा जिले के बैजनाथ क्षेत्र के नितिन ठाकुर ने भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन प्राप्त किया है। नितिन सैन्य परंपरा वाले परिवार से आते हैं। उनके दादा सेना में सूबेदार रह चुके हैं जबकि नाना कैप्टन के पद पर देश की सेवा कर चुके हैं। उनकी उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।

बैजनाथ के अनिमेष कुमार ने भारतीय सेना में अधिकारी बनकर अपने परिवार का सपना पूरा किया। अनिमेष के दादा सेना और प्रशासनिक सेवा में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। परिवार की इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए अनिमेष अब भारतीय सेना में देश सेवा करेंगे।

सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र के विवेक चौहान और तेजेंद्र ठाकुर भी सेना में अधिकारी बने हैं। विवेक चौहान की उपलब्धि इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि उनके पिता कर्नल जेएस चौहान भी वर्ष 2002 में इसी आईएमए देहरादून से अधिकारी बने थे। वहीं तेजेंद्र ठाकुर की सफलता पर उनके गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।

ऊना जिले के नकड़ोह गांव के अर्पित जसवाल ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर अपना सपना साकार किया। उनकी नियुक्ति बॉम्बे इंजीनियर्स में हुई है। अर्पित ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, दादा-दादी और शिक्षकों को दिया।

धर्मशाला के श्यामनगर निवासी गौरव ठाकुर भी सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। गौरव ऐसे परिवार से आते हैं, जहां सेना में सेवा देना एक परंपरा रही है। उनके पिता सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हुए हैं जबकि दादा भी सेना में हवलदार रहे हैं।

मंडी जिले के जोगिंद्रनगर निवासी सृजन गोस्वामी ने एनडीए और आईएमए से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सेना में लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया। उन्होंने इस सफलता का श्रेय अपने परिवार और शिक्षकों को दिया।

वहीं रैंखा क्षेत्र के साहिल कुमार सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। उनके परिवार की तीसरी पीढ़ी भारतीय सेना में पहुंची है। पिता रिटायर्ड कैप्टन हैं और परिवार के अन्य सदस्य भी लंबे समय तक सेना में सेवाएं दे चुके हैं।

इसके अलावा तन्मय सांख्यान ने भी सेना में अधिकारी बनकर अपने परिवार की सैन्य विरासत को आगे बढ़ाया है। उनके दादा और पिता दोनों भारतीय सशस्त्र बलों में महत्वपूर्ण सेवाएं दे चुके हैं। अब तन्मय तीसरी पीढ़ी के रूप में देश सेवा की जिम्मेदारी निभाएंगे।

इन सभी युवा अधिकारियों की सफलता हिमाचल प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह उपलब्धि साबित करती है कि प्रदेश के युवा न केवल शिक्षा और खेलों में बल्कि देश की सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। पूरे प्रदेश को इन युवा अफसरों पर गर्व है।